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मंथन : राष्ट्रीय सुरक्षा-एक दृष्टि

Contributor(s): Publication details: Delhi Forum for awareness of national security (FANS)Description: viii, 264pISBN:
  • 9788188671-25-0
Other title:
  • Manthan: national security-one vision
DDC classification:
  • 355.033054 MAN-
Summary: भारत देश के सामने इसकी आंतरिक सीमांत व ब्रह्या सुरक्षा को देखते हुए एक चुनौती लगातार दिखाई दे रही है कि अपना ये राष्ट हर दृस्टि में केवल अपनी सुरक्षा करने में ही सक्षम न हो बल्कि अधिक शक्तिमान देश हो जिससे हम, वासुदेव कुटुंबकम, पूरा विश्व का परिवार है, कि धरना को धरती पर पुनः स्तापित कर सकें । देशो में यूद्ध न हो बल्कि सभी देश एक दूसरे से समन्वय बैठाकर रहें यानि हम पर कोई आक्रमण करे नहीं , और हमे किसी पर आक्रमण करने कि जरुरत पड़े नहीं । वर्षानुवास विश्व को यूद्ध मुक्त विश्व बनाया जा सके । इसी के साथ साथ कोई भी देश किसी दूसरे देश कि सीमा और उसके भीतर किसी भी हिंसक गतिविदियों को बढ़ावा न दे । दुनिया के सभी देश आपस में नागरिक सीमाओ के साथ रहें ना कि सैनिक सीमाओ के साथ । नागरिक सीमा यानि एक दूसरे से प्यार , परस्पर सहयोग, शांति भाईचारे और विकास से जीना और सैनिक सीमा यानि हिंसा, तबाही और आक्रांताओ के रूप में जीना । पूरा यूरोप नागरिक सीमाओ के रूप में जी रहा है इसलिए ना गोलाबारी, ना घूसपैठ , न हमले और ना ही पासपोर्ट वीसा का सिस्टम, है तो बस शांति, विकास और समृद्धि ।
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Books NASSDOC Library GIFT 355.033054 MAN- (Browse shelf(Opens below)) Available 50468

भारत देश के सामने इसकी आंतरिक सीमांत व ब्रह्या सुरक्षा को देखते हुए एक चुनौती लगातार दिखाई दे रही है कि अपना ये राष्ट हर दृस्टि में केवल अपनी सुरक्षा करने में ही सक्षम न हो बल्कि अधिक शक्तिमान देश हो जिससे हम, वासुदेव कुटुंबकम, पूरा विश्व का परिवार है, कि धरना को धरती पर पुनः स्तापित कर सकें । देशो में यूद्ध न हो बल्कि सभी देश एक दूसरे से समन्वय बैठाकर रहें यानि हम पर कोई आक्रमण करे नहीं , और हमे किसी पर आक्रमण करने कि जरुरत पड़े नहीं । वर्षानुवास विश्व को यूद्ध मुक्त विश्व बनाया जा सके । इसी के साथ साथ कोई भी देश किसी दूसरे देश कि सीमा और उसके भीतर किसी भी हिंसक गतिविदियों को बढ़ावा न दे । दुनिया के सभी देश आपस में नागरिक सीमाओ के साथ रहें ना कि सैनिक सीमाओ के साथ । नागरिक सीमा यानि एक दूसरे से प्यार , परस्पर सहयोग, शांति भाईचारे और विकास से जीना और सैनिक सीमा यानि हिंसा, तबाही और आक्रांताओ के रूप में जीना । पूरा यूरोप नागरिक सीमाओ के रूप में जी रहा है इसलिए ना गोलाबारी, ना घूसपैठ , न हमले और ना ही पासपोर्ट वीसा का सिस्टम, है तो बस शांति, विकास और समृद्धि ।

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