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मेरे जेल के अनुभव / महात्मा गांधी

By: Publication details: Delhi : अनन्या प्रकाशन , 2018.Description: 88pISBN:
  • 9789387145399
Subject(s): DDC classification:
  • 920.5 GAN-M
Summary: मैंने मुख्य दारोग“ा से कहा कि मेरे बाल और मूँछ कटवा दीजिए । उसने कहा, गवर्नर ने सख्त मुमानियत की है । मैंने कहाµमुझे मालूम है कि गवर्नर मुझे बाध्य नहीं कर सकते, परन्तु मैं तो अपनी राजी से बाल कटवाना चाहता हूं । उसने कहा, गवर्नर से अर्ज करो । दूसरे दिन गवर्नर ने आज्ञा तो दे दी, पर कहा कि दो महीने में अभी तो तुम्हारे दो ही दिन बीते हैं, इतने ही में तुम्हारे बाल कटवाने का अ/िाकार मुझे नहीं । मैंने कहाµयह मैं जानता हूँ, परन्तु अपने आराम के लिए मैं अपनी इच्छा से उन्हें कटवाना चाहता हूँ । इस पर उसने हँस कर बात टाल दी । पीछे से मुझे मालूम हुआ कि गवर्नर को बहुत शक और डर हो गया था कि मेरी इस बात में कोई रहस्य तो नहीं है! उसके मत्थे मढ़ कर कहीं जबरदस्ती बाल–मूँछ काट डालने का बावेला तो मैं न मचाऊँ ? परन्तु मैं बार–बार कहता ही रहा । मैंने यहाँ तक कह दिया कि मैं लिखे देता हूँ कि मैं अपनी इच्छा से बाल कटवाता हूँ । तब कहीं गवर्नर का शक दूर हुआ और उसने दारोग“ा को जबानी हुक्म दिया कि, इन्हें कैंची दे दो
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Books NASSDOC Library 920.5 GAN-M (Browse shelf(Opens below)) Available 54582

मैंने मुख्य दारोग“ा से कहा कि मेरे बाल और मूँछ कटवा दीजिए । उसने कहा, गवर्नर ने सख्त मुमानियत की है । मैंने कहाµमुझे मालूम है कि गवर्नर मुझे बाध्य नहीं कर सकते, परन्तु मैं तो अपनी राजी से बाल कटवाना चाहता हूं । उसने कहा, गवर्नर से अर्ज करो । दूसरे दिन गवर्नर ने आज्ञा तो दे दी, पर कहा कि दो महीने में अभी तो तुम्हारे दो ही दिन बीते हैं, इतने ही में तुम्हारे बाल कटवाने का अ/िाकार मुझे नहीं । मैंने कहाµयह मैं जानता हूँ, परन्तु अपने आराम के लिए मैं अपनी इच्छा से उन्हें कटवाना चाहता हूँ । इस पर उसने हँस कर बात टाल दी । पीछे से मुझे मालूम हुआ कि गवर्नर को बहुत शक और डर हो गया था कि मेरी इस बात में कोई रहस्य तो नहीं है! उसके मत्थे मढ़ कर कहीं जबरदस्ती बाल–मूँछ काट डालने का बावेला तो मैं न मचाऊँ ? परन्तु मैं बार–बार कहता ही रहा । मैंने यहाँ तक कह दिया कि मैं लिखे देता हूँ कि मैं अपनी इच्छा से बाल कटवाता हूँ । तब कहीं गवर्नर का शक दूर हुआ और उसने दारोग“ा को जबानी हुक्म दिया कि, इन्हें कैंची दे दो

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