पुराणों में निर्वचन
अग्रवाल, मीनू
पुराणों में निर्वचन Purano mein nirvachan /मीनू अग्रवाल - प्रयागराज : फर्स्ट प्रिन्ट पब्लिकेशन, 2024. - xviii, 203p.
यह पुस्तक पौराणिक साहित्य में उपलब्ध निर्वचन परंपरा का एक सुव्यवस्थित और मौलिक अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें अष्टादश पुराणों में बिखरे हुए निर्वचनों को पहली बार हिंदी भाषा में अक्षरानुक्रम से संकलित किया गया है तथा उन्हें प्राचीन ग्रंथीय संदर्भों और मूर्तिशिल्प चित्रों से पुष्ट किया गया है। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के अनुदान से सम्पन्न यह शोधग्रंथ पौराणिक शब्दों की व्युत्पत्ति और अर्थ-विवेचना को स्पष्ट करता है। यह पुस्तक न केवल शोधार्थियों के लिए, बल्कि भारतीय संस्कृति और पुराणों में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है।
9789393647504
Philology--Indic literature
Sanskrit language
संस्कृत भाषा
भाषाशास्त्र--इंडिक साहित्य
294.592046 / AGR-P
पुराणों में निर्वचन Purano mein nirvachan /मीनू अग्रवाल - प्रयागराज : फर्स्ट प्रिन्ट पब्लिकेशन, 2024. - xviii, 203p.
यह पुस्तक पौराणिक साहित्य में उपलब्ध निर्वचन परंपरा का एक सुव्यवस्थित और मौलिक अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें अष्टादश पुराणों में बिखरे हुए निर्वचनों को पहली बार हिंदी भाषा में अक्षरानुक्रम से संकलित किया गया है तथा उन्हें प्राचीन ग्रंथीय संदर्भों और मूर्तिशिल्प चित्रों से पुष्ट किया गया है। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के अनुदान से सम्पन्न यह शोधग्रंथ पौराणिक शब्दों की व्युत्पत्ति और अर्थ-विवेचना को स्पष्ट करता है। यह पुस्तक न केवल शोधार्थियों के लिए, बल्कि भारतीय संस्कृति और पुराणों में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है।
9789393647504
Philology--Indic literature
Sanskrit language
संस्कृत भाषा
भाषाशास्त्र--इंडिक साहित्य
294.592046 / AGR-P
