चल खुसरो घर आपने / (Record no. 38398)
[ view plain ]
| 000 -LEADER | |
|---|---|
| fixed length control field | 03935nam a2200253 4500 |
| 020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER | |
| ISBN | 9788183612876 |
| 041 ## - LANGUAGE CODE | |
| Language code of text/sound track or separate title | hin |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | 891.433 |
| Item number | SHI-C |
| 100 1# - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME | |
| Personal name | शिवानी |
| Fuller form of name | Shivani |
| Relator term | लेखक [author]. |
| 245 10 - TITLE STATEMENT | |
| Title | चल खुसरो घर आपने / |
| Statement of responsibility, etc | शिवानी |
| 246 ## - VARYING FORM OF TITLE | |
| Title proper/short title | Chal Khusro Ghar Aapne |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT) | |
| Place of publication | दिल्ली : |
| Name of publisher | राधाकृष्ण प्रकाशन, |
| Year of publication | 2019. |
| 300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION | |
| Number of Pages | 132p. |
| 504 ## - BIBLIOGRAPHY, ETC. NOTE | |
| Bibliography, etc | Includes bibliographical references and index. |
| 520 ## - SUMMARY, ETC. | |
| Summary, etc | कैसी विचित्र पुतलियाँ लग रही थीं मालती की। जैसे दगदगाती हीरे की दो कनियाँ हों. बार-बार वह अपनी पतली जिला को अपने रक्तवर्णी अधरों पर फेर रही थी, यह तो नित्य की सौम्य शान्त स्वामिनी नहीं, जैसे भयंकर अग्निशिखा लपटें ले रही थी...।' यह कहानी है। कुमुद की, जिसे बिगड़ैल भाई-बहनों और आर्थिक, पारिवारिक परिस्थितियों ने सुदूर बंगाल जाकर एक राजासाहब की मानसिक रूप से बीमार पत्नी की परिचर्या का दुरूह भार थमा दिया है। मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों का मनोसंसार, निम्नमध्यवर्गीय परिवार की कमासुत अनब्याही बेटी और उसकी ग्लानि से दबी जाती माँ का मनोविज्ञान, शिवानी के पारस स्पर्श से समृद्ध होकर इस उपन्यास को एक अद्भुत नाटकीय कलेवर और पठनीयता देते हैं। शिवानी का 'विवर्त' मानव जीवन की रहस्यमयता का एक विलक्षण पहलू प्रस्तुत करता है। चरित्र नायिका ललिता गरीब माता-पिता की सात पुत्रियों में सबसे छोटी होने पर भी स्वतंत्र मेधा और तेजस्विनी है और डबल एम.ए. करके हेडमिस्ट्रेस बन जाती है। वह विवाह नहीं करना चाहती और आने वाले सभी रिश्तों को ठुकरा देती है परन्तु प्रारब्ध उसके साथ ऐसा खेल खेलता है कि वह स्तब्ध रह जाती है। अपने अन्य सभी उपन्यासों की भाँति शिवानी का यह उपन्यास भी पाठक को मंत्र-मुग्ध कर देने में समर्थ है |
| 546 ## - LANGUAGE NOTE | |
| Language note | Hindi. |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | साहित्य में पारिवारिक रिश्ते. |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | साहित्य में मानसिक स्वास्थ्य. |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | साहित्य में सामाजिक वर्ग. |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | साहित्य में महिलाएँ. |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | भारतीय कथा साहित्य (हिन्दी). |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | महिला लेखिकाएँ, हिन्दी. |
| 942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA) | |
| Source of classification or shelving scheme | Dewey Decimal Classification |
| Koha item type | Books |
| Withdrawn status | Lost status | Damaged status | Not for loan | Home library | Current library | Date acquired | Source of acquisition | Cost, normal purchase price | Full call number | Accession Number | Cost, replacement price | Price effective from | Koha item type |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| NASSDOC Library | NASSDOC Library | 17/03/2023 | Overseas | 0.00 | 891.433 SHI-C | 53416 | 0.00 | 07/06/2023 | Books |
