कलम को तीर होने दो: (Record no. 38847)
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| 000 -LEADER | |
|---|---|
| fixed length control field | 03651nam a22001697a 4500 |
| 020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER | |
| ISBN | 9789392013331 |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | 891.2 |
| Item number | VID-K |
| 100 ## - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME | |
| Personal name | विद्याभूषण |
| Fuller form of name | VidyaBhooshan |
| 245 ## - TITLE STATEMENT | |
| Title | कलम को तीर होने दो: |
| Statement of responsibility, etc | विद्याभूषण |
| 246 ## - VARYING FORM OF TITLE | |
| Title proper/short title | Kalam ko teer hone do |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT) | |
| Place of publication | नई दिल्ली : |
| Name of publisher | ग्रंथ अकादमी, |
| Year of publication | 2023. |
| 300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION | |
| Number of Pages | 176p. |
| 520 ## - SUMMARY, ETC. | |
| Summary, etc | श-देशांतर तक पसरे हिंदी-संसार में सृजनशीलता का जो केंद्रीय प्रवाह है, उसमें दूरस्थ अंचलों और दिशाओं की लेखकीय ऊर्जा भी विसर्जित होती है, किंतु उस विराट संगम में जानी-मानी नदियों की जलधाराएँ तो यथेष्ट मान-पहचान पाती हैं, मगर अनगिनत प्रपातों और अंत सलिलाओं के अंशदान की लगातार अनदेखी होती आई है। हिंदी सर्जना के आंचलिक परिदृश्य को अगर समग्रता में परखें तो कई बुनियादी सवाल सिर उठाते हैं; जैसे क्या श्रेष्ठ और प्रभावी कृतियों की अंतर्वस्तु का कोई स्थानिक पहलू नहीं होता? क्या कोई आंचलिक या स्थानीय प्रेरणा अभिव्यक्ति के आकार-प्रकार को निर्धारित नहीं करती? क्या कृति और परिवेश के जैविक संबंधों की अनदेखी से रचना का संदेश संदर्भ रहित होकर अमूर्त नहीं रह जाता? सच तो यह भी है कि राजधानियों का लेखक सिर्फ अपने निकट परिवेश से उत्प्रेरित नहीं होता। अपने मूल और गुमनाम स्त्रोतों से सुलभ हो रही दिशा-दृष्टि भी उसे उच्चतर जीवनमूल्यों से जोड़ती है। प्रस्तुत पुस्तक सृजन और विचार के प्रसंग में, केंद्र और हाशिए के बीच के फासलों पर खोजी नजर डालती है। पुस्तक-संसार में झारखंड की सांस्कृतिक परंपरा पर अधीत सामग्री की कमी नहीं है, लेकिन उसके साहित्य की हिंदी परंपरा के विविध पहलुओं पर समग्र विचार अभी तक प्रतीक्षारत है। निश्चय ही इस पुस्तक में सम्मिलित आलेख सूचनाओं के नए क्षितिजों से निकट परिचय कराएँगे। |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | Hindi literature |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | हिंदी साहित्य |
| 942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA) | |
| Source of classification or shelving scheme | Dewey Decimal Classification |
| Koha item type | Books |
| Withdrawn status | Lost status | Damaged status | Not for loan | Collection code | Home library | Current library | Date acquired | Source of acquisition | Cost, normal purchase price | Bill Date | Full call number | Accession Number | Copy number | Cost, replacement price | Price effective from | Koha item type |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह | NASSDOC Library | NASSDOC Library | 20/03/2024 | All India Book House | 216.60 | 20/03/2024 | 891.2 VID-K | 54009 | 300.00 | 20/03/2024 | Books |
