मध्यकालीन भारत का आर्थिक इतिहास (1500-1800) / (Record no. 39401)

MARC details
000 -LEADER
fixed length control field 04956nam a2200241 4500
020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER
ISBN 9789393603791
041 ## - LANGUAGE CODE
Language code of text/sound track or separate title hin-
082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER
Classification number 330.9540903
Item number SIN-M
100 ## - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME
Personal name सिंह, सुनील कुमार
Relator term लेखक
245 ## - TITLE STATEMENT
Title मध्यकालीन भारत का आर्थिक इतिहास (1500-1800) /
Statement of responsibility, etc सुनील कुमार सिंह
246 ## - VARYING FORM OF TITLE
Title proper/short title Madhyakalin Bharat Ka Arthik Itihas (1500-1800) by Sunil Kumar Singh
260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT)
Place of publication नई दिल्ली:
Name of publisher लोकभारती प्रकाशन,
Year of publication 2023.
300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION
Number of Pages 239p.
504 ## - BIBLIOGRAPHY, ETC. NOTE
Bibliography, etc Including Bibliography and Index.
520 ## - SUMMARY, ETC.
Summary, etc यह पुस्तक नवीनतम स्रोत सामग्री को सन्दर्भित करते हुए लिखी गई है। लेखक ने बड़ी कुशलता के साथ सन्दर्भ ग्रन्थों को समन्वयित किया है कि विशेषज्ञों के अलावा साधारण पाठकों को भी आख्यान बोधगम्य हो सके। इस पुस्तक में मुगलों की नई काराधान व्यवस्था के आने से कृषि के क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली संकटपूर्ण परिस्थितियों को उजागर किया है। लेखक का मानना है कि इस संकट के बावजूद ग्रामीण घरों में सूत कातने और कपड़ा बुनने की परम्पराएँ कायम रहीं। किन्तु मुग़ल नीतियों का दूरगामी परिणाम यह हुआ कि कृषि और शिल्प दो अलग-अलग व्यवसायों के रूप में नज़र आने लगे। अध्याय के अन्त में लेखक ने परम्परागत शिल्पों को स्वतन्त्र व्यवसाय के रूप में प्रस्तुत कर लम्बे अरसे से चली आ रही भ्रान्तियों को दूर किया है। शिल्प उत्पादन के सम्बन्ध में विस्तृत वृत्तान्त मिलता है। दक्षिण भारत के राजस्व इतिहास को समाहित कर इस पुस्तक को पूर्णतः समावेशी बना दिया गया है। पाँचवें अध्याय में मध्यकालीन कराधान की व्यवस्था, शहरी उत्पादन, सिक्कों के प्रकार और प्रसार का उल्लेख है। मध्यकालीन भारत में नाप-तौल की प्रणालियों, मजदूरी और उत्पादकों पर विदेशी पूँजी के बढ़ते दबाव से सम्बन्धित है। लेखक ने तालिकाओं और आँकड़ों की सहायता से व्यापार और व्यवसायों के समक्ष बढ़ती चुनौतियों को स्पष्ट किया है। विश्वास है कि सुधी पाठकों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे पाठकों को यह रचना समान रूप से पसन्द आएगी। ललित जोशी प्रोफेसर, इतिहास विभाग
546 ## - LANGUAGE NOTE
Language note Hindi.
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term भारत – आर्थिक इतिहास
Form subdivision अध्ययन और विश्लेषण
General subdivision 1500-1800
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term मुगलकालीन अर्थव्यवस्था
Form subdivision कृषि और व्यापार
General subdivision आर्थिक नीतियाँ और संरचना
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term भारतीय व्यापार और वाणिज्य
Form subdivision आर्थिक प्रभाव
General subdivision मध्यकालीन भारत
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term कर प्रणाली और भूमि व्यवस्था
Form subdivision प्रशासनिक नीतियाँ
General subdivision मुगल और मराठा शासन
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term वैश्विक आर्थिक प्रभाव
Form subdivision भारत और यूरोपीय व्यापार
General subdivision 16वीं-18वीं शताब्दी
942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA)
Source of classification or shelving scheme Dewey Decimal Classification
Koha item type Books
Holdings
Withdrawn status Lost status Damaged status Not for loan Home library Current library Date acquired Source of acquisition Cost, normal purchase price Bill Date Full call number Accession Number Cost, replacement price Price effective from Koha item type
        NASSDOC Library NASSDOC Library 21/03/2024 Overseas Press India Private Limited. 573.99 2024-03-21 330.9540903 SIN-M 54616 795.00 21/03/2024 Books