मुक्तक आ खड़ा सड़क पर / (Record no. 39832)
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| 000 -LEADER | |
|---|---|
| fixed length control field | 04590nam a22001937a 4500 |
| 041 ## - LANGUAGE CODE | |
| Language code of text/sound track or separate title | hin |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | 821 |
| Item number | VIJ-M |
| 100 ## - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME | |
| Personal name | विजयवर्गीय, डॉ दयाकृष्ण |
| Relator term | लेखक |
| Fuller form of name | डॉ दयाकृष्ण विजयवर्गीय 'विजय' |
| 245 ## - TITLE STATEMENT | |
| Title | मुक्तक आ खड़ा सड़क पर / |
| Statement of responsibility, etc | डॉ दयाकृष्ण विजयवर्गीय 'विजय' |
| 246 ## - VARYING FORM OF TITLE | |
| Title proper/short title | Muktak aa khada sadak par... by Dr. Dayakrishn Vijayvargiya 'Vijay' |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT) | |
| Place of publication | कोटा, राजस्थान : |
| Name of publisher | विजय प्रकाशन, |
| Year of publication | 2013. |
| 300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION | |
| Number of Pages | 94p. |
| 520 ## - SUMMARY, ETC. | |
| Summary, etc | मुक्तक (चतुष्पदी) हिन्दी साहित्य में काव्य की एक विशिष्ट विधा मानी गई है। इसकी विशिष्टता इसकी पूर्णता में है। चारों पंक्तियों को पढ़े जाने के पश्चात्, इसे किसी पूर्वापर प्रसंग की अपेक्षा नहीं रहती । विद्वानों ने वेद ऋचाओं से ही मुक्तक साहित्य का प्रारम्भ माना है। अनेक संस्कृत ग्रंथों ने मुक्तक को परिभाषित भी किया है। अग्निपुराणकार से लेकर आचार्य अभिनव गुप्त तक ने मुक्तक को अपने ग्रंथों में परिभाषित किया है। हिन्दी में आचार्य रामचन्द शुक्ल ने भी अपने हिन्दी साहित्य के इतिहास में मुक्तक की, महाकाव्यों की रसात्मकता से तुलना करते हुए, इसकी पूर्णता प्रतिपादित कर, किसी पूर्वापर प्रसंग की आवश्यकता अनुभव नहीं की है। यह यही है कि सभी विद्वानों ने दोहों को दृष्टि में रखकर ही मुक्तको पर विचार किया है। दोहे अपने छोटे से कलेवर में भी कथ्य की पूर्णता सहेजे होते हैं। उनके लिए कहा भी गया है" देखन में छोटे लगे, घाव करें गम्भीर "। गजल के हर शेर (बंध) के संबंध में ही यही कहा जाता है कि उसका हर शेर अपने में स्वतंत्र तथा पूर्ण होता है। वैसे मैं यह मानता हूँ, वह पूरी गजल की प्रासंगिकता के प्रतिकूल कभी नहीं होता। मुक्तक दोहों से आकार में दुगने से भी अधिक बड़ा होता है, लेकिन दोनों में एक बात समान है, वह है विषय गत। जैसे दोहों का विषय गत विस्तार अनन्त है, वैसे ही मुक्तक भी विषयगत अनन्तता सहेजे होता है। हों एक मिन्नता भी दोनों में विल्कुल स्पष्ट है। दोहा स्वयं एक छन्द है। मुक्तक स्वयं छन्द नहीं है। दोहे को उसके निर्धारित प्रारूप में ही लिखा जा सकता है, जबकि मुक्तक किसी भी छन्द में, यहाँ तक की दोहे में भी लिखा जा सकता है। |
| 546 ## - LANGUAGE NOTE | |
| Language note | हिंदी |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | हिंदी काव्य |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | मुक्तक (कविता). |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | हिन्दी साहित्य |
| General subdivision | आलोचना एवं व्याख्या. |
| 942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA) | |
| Source of classification or shelving scheme | Dewey Decimal Classification |
| Koha item type | Books |
| Withdrawn status | Lost status | Damaged status | Not for loan | Home library | Current library | Date acquired | Source of acquisition | Cost, normal purchase price | Bill Date | Total Checkouts | Full call number | Accession Number | Date last seen | Cost, replacement price | Price effective from | Koha item type |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| NASSDOC Library | NASSDOC Library | 02/12/2024 | Gratis | 0.00 | NA | 821 VIJ-M | 54819 | 22/10/2025 | 150.00 | 02/12/2024 | Books |
