रामचन्द्र शुक्ल / मलयज
Language: hin- Publication details: दिल्ली : राजकमल प्रकाशन, 2022.Description: 134pISBN:- 9789392757594
- Ramchandra Shukla
- 891.4387109 MAL-R
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NASSDOC Library | 891.4387109 MAL-R (Browse shelf(Opens below)) | Available | 53446 |
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| 891.438 MAT-M मेरे विचार | 891.43809 STR- स्त्री चिन्तन : | 891.438409 DAL-H हिंदू परम्पराओं का राष्ट्रीयकरण : | 891.4387109 MAL-R रामचन्द्र शुक्ल / | 891.439 CHU-T टेढ़ी लकीर / | 891.439 VAJ-N नक्षत्रहीन समय में / | 891.4390932 MAJ-W The world in words : |
Includes bibliographical references and index.
विस्मरण के इस हाहाकारी उत्सवी दौर में भुला दिए गए विलक्षण कवि-आलोचक मलयज और उनकी पुस्तक 'रामचन्द्र शुक्ल' की पुनर्प्रस्तुति का साहित्यिक और अकादमिक महत्त्व निर्विवाद है। मलयज की आलोचना पद्धति के कायल सब लोग हैं, जिन्होंने उनका लिखा कुछ भी पढ़ा है। भौतिक रूप से मिले छोटे से जीवन में मलयज ने सृजन के कई मानक स्थापित किए। यह पुस्तक' भी अपने संक्षिप्त कलेवर में ही एक प्रतिमान की तरह है । मलयज ने एक अपूर्व आलोचक-चिन्तक के रूप में रामचन्द्र शुक्ल का जिस प्रकार मूल्यांकन किया है, उसका सानी कोई दूसरा नहीं है। यह अकारण नहीं है कि इस पुस्तक को सम्पादित करने वाले सुप्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह ने अपनी भूमिका का शीर्षक ही दिया था- मलयज की संघर्ष मीमांसा। मलयज रामचन्द्र शुक्ल की 'रस-मीमांसा' के बड़े प्रशंसक थे। उनकी अन्तर्दृष्टि मलयज की अन्तर्दृष्टि में उसी प्रकार घुली है जिस प्रकार दाल में नमक घुल जाता है। लेकिन यहाँ यह याद रखना ज़रूरी है कि दाल में नमक का बहुत महत्त्व है लेकिन वह पूरी दाल नहीं है। वह उसका एक घटक भर है। कहने की आवश्यकता नहीं कि रामचन्द्र शुक्ल के दाय को स्वीकार करते हुए मलयज ने नया बहुत कुछ जोड़ा और हिन्दी आलोचना को गहरी विश्वसनीयता भी दी। हिन्दी के युवा आलोचकों के लिए मलयज की विश्लेषण पद्धति और भाषा में सीखने के लिए बहुत कुछ है। उनकी आलोचना एक पाठशाला की तरह है।
Hindi.
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