लोकतंत्र में लोक/ देवदास आपटे
Publication details: प्रभात प्रकाशन : 2023 नई दिल्ली,Description: 199p. 23cmISBN:- 978-9351866664
- people in democracy
- 321.854 APT-L
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
Books
|
NASSDOC Library | हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह | 321.854 APT-L (Browse shelf(Opens below)) | Available | 54041 |
Browsing NASSDOC Library shelves,Collection: हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह Close shelf browser (Hides shelf browser)
|
|
No cover image available |
|
|
|
|
||
| 320.95491 SHO-P पकिस्तान बांग्लादेश: | 321.020954 SRI-R Rajyapalon ki badalti bhumika | 321.809544 MAT-; SL1 Samantavad se lokatantra | 321.854 APT-L लोकतंत्र में लोक/ | 322.10954 VIJ-; Rajniti ke upekshit prashan | 323 CHA-A Ambedkar ke chintan mein manawadhikar | 323 RAM-M Manav adhikar: vivdha aayam evam chunautiya |
वरिष्ठ समाजधर्मी श्री देवदास आपटे के सामाजिक दृष्टिकोण को दरशाते लेखों का पठनीय संकलन। उन्होंने ‘लोक’ के बीच अपना जीवन बिताया है। उनके सुख-दु:ख को देखा, सुना और आत्मसात् किया है। वह ‘लोक’ जिसका जीवन खुली किताब के रूप में होता है। ऐसा ‘लोक’ ग्रामीण जीवन का ही है। अत्यंत सहृदय और संवेदनशील, तो दूसरी तरफ हृदयहीन और कठोर भी। अज्ञान और ज्ञान से भरा हुआ। वह लोक, जो साफ-साफ बोलता है, सबको समझता है। पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय समस्याओं की गहरी जानकारी, उनके निदान की प्रबल व्यावहारिक सोच और अपनी राजनैतिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए देश के कोने-कोने में घूमते रहना आपटेजी के शौक हैं। अतीव संवेदनशील होने के कारण समस्याओं की जड़ तक जाना और उनका समाधान ढूँढ़ना, बेबाकी से बोलना और लिखना इनकी विशेषता रही है। नेता और जनता, शहर और गाँव, करणीय और अकरणीय में बना फासला दिनानुदिन बढ़ता गया है, इसके साथ समस्याएँ भी। देवदासजी के ये आलेख फासला पाटने की कोशिश करनेवालों के लिए जहाँ मार्गदर्शक हैं, वहीं नीतियाँ और कार्यक्रम बनानेवालों के लिए जानकारियाँ भी|
There are no comments on this title.
