राष्टीय स्वयसेवक संघ: स्वर्णिम भरत के दिशा सूत्र स्वर्णिम भरत के दिशा सूत्र/ सुनील, आम्बेकर
Publication details: प्रभात प्रकाशन 2023Description: 272pISBN:- 9789390378111
- 320.540954 AMB-R
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NASSDOC Library | हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह | 320.540954 AMB-R (Browse shelf(Opens below)) | Available | 54039 |
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| 320.5 SIN-P पाश्चात्य सामाजिक चिन्तक: | 320.532 KED-K कम्युनिस्ट चीन: | 320.54 GUR-S सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अग्रदूत/ | 320.540954 AMB-R राष्टीय स्वयसेवक संघ: स्वर्णिम भरत के दिशा सूत्र | 320.654 SAH-V विकास की राजनीति | 320.72 ICS-V ICSSR research surveys and explorations: Political Science: India engages the world | 320.95491 SHO-P पकिस्तान बांग्लादेश: |
यद्यपि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दीर्घ-यात्रा पर अनेक पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं, फिर भी संघ सदैव ही सुर्खियों में रहता है। हाल के दिनों में संघ के कामकाज को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है, क्योंकि एक ओर इन दिनों में बहुत से स्वयंसेवक सरकार में शीर्ष पदों पर पहुँचे हैं, वहीं दूसरी ओर संघ के हिंदू-राष्ट्र और एकात्मता के मूल विचार अब हमारे सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र की मुख्यधारा बन गए हैं। भारत के लिए संघ का दृष्टिकोण क्या है? यदि भारत एक हिंदू-राष्ट्र बन जाता है, तो इसमें मुसलमानों और अन्य धर्मों का क्या स्थान होगा? इतिहास-लेखन की संघ की परियोजना कितनी बड़ी है? क्या हिंदुत्व जाति की राजनीति को खत्म कर देगा? परिवार की बदलती प्रकृति और विभिन्न सामाजिक अधिकारों पसंघ का क्या दृष्टिकोण है? संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुनील आंबेकरजी ने इस पुस्तक में इन सवालों का विश्लेषण किया है। आंबेकरजी को तथ्यों की गहरी समझ है, इसी कारण से वे विचार की स्पष्टता और उसके विस्तार, दोनों पर ध्यान केंद्रित करने में सफल हुए हैं। एक स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने शाखा पद्धति में कार्य किया है और उसे अपने जीवन में जिया है, उसी के आधार पर संघ की आंतरिक कार्य-प्रणाली, निर्णय-प्रक्रिया और समन्वयक-दृष्टि पर गहराई से दृष्टिपात किया है। वास्तविक जीवन के अनुभवों से भरपूर ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : स्वर्णिम भारत के दिशा-सूत्र’ उन सभी के लिए एक पठनीय पुस्तक है, जो संघ-शक्ति की कार्यप्रणाली और इसकी भविष्य की योजनाओं को समझने के इच्छुक हैं।
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