नई भाजपा के शिल्पकार/ अजय सिंह; translated by सुनील त्रिवेदी
Publication details: प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली: 2023Description: 200pISBN:- 9789355218919
- Nai Bhajapa Ke Shilpakaar
- 324.254 SIN-N
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
Books
|
NASSDOC Library | हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह | 324.254 SIN-N (Browse shelf(Opens below)) | Available | 54021 |
Browsing NASSDOC Library shelves,Collection: हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह Close shelf browser (Hides shelf browser)
|
|
|
|
|
|
|
||
| 324.2092 ROY-A Apratim nayak: Dr. Syama Prasad Mookerjee | 324.209542 MIS-B Bharatiya raajneeti mein kshetriya dal: samajwadi party ka adhyayan | 324.209542 MIS-B Bharatiya raajneeti mein kshetriya dal: samajwadi party ka adhyayan | 324.254 SIN-N नई भाजपा के शिल्पकार/ | 324.254083 MIS-B Bharat mein gaircongressi sarkarai: Uttar Pradesh ke paripekshya me tulnatmak adhyayan | 324.254083 MIS-B Bharat mein gaircongressi sarkarai: Uttar Pradesh ke paripekshya me tulnatmak adhyayan | 324.254083 RAG-V SL1 Varanasi aur bhartiy rashtriy kangresa 1947-74 |
अपनी स्थापना के लगभग 40 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है और भारतीय राजनीति में अपनी स्थिति को निरंतर अधिक सुदृढ़ बनाती जा रही है। इस पार्टी का ऐतिहासिक अभ्युदय कुछ लोगों को सहज और स्वत:स्फूर्त लग सकता है, लेकिन 18 करोड़ सदस्यों के इस संगठन का मार्ग प्रशस्त करने के पीछे गहन आंतरिक विचार-विमर्शों और योजनाओं का योगदान रहा है।
गहरे शोध तथा ठोस उदाहरणों के माध्यम से 'नई भाजपा के शिल्पकार' में पिछले दशकों के दौरान हुए पार्टी के कायाकल्प की व्याख्या की गई है। इस प्रसंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐसे योगदानों पर प्रकाश डाला गया है, जिनके बारे में लोग कम जानते हैं। संगठन निर्माण के पारंपरिक तरीकों से परे जाकर किए गए उनके प्रयोग, सूक्ष्मता के साथ हर आयाम पर उनकी पैनी नजर और पार्टी के जनाधार का विस्तार करने के लिए उनकी अभिनव पद्धतियों को यह पुस्तक उजागर करती है।
पार्टी के संस्थापकों द्वारा सन् 1951 में अपनाई गई दृष्टि पर आधारित अतीत के विश्लेषण के साथ-साथ अजय सिंह ने भाजपा के भविष्य की झलक भी दिखाई है। अनेक पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और समीक्षकों के साथ विस्तृत साक्षात्कारों पर आधारित विवरणों से पता चलता है कि किस प्रकार कैडर पर आधारित इस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए एक नितांत भारतीय मॉडल को विकसित किया, जिसके आधार पर अंतत: भाजपा चुनाव जीतने वाली एक मशीन के रूप में स्थापित हो गई है।
There are no comments on this title.
