जंबूद्वीपे भरतखंडे: मयंक, मुरारी
Language: Hindi Publication details: प्रभात प्रकाशन 2023 दिल्लीDescription: 224pISBN:- 9789390372713
- Jambudweepe Bharatkhande: Sanatan Pravah Ka Mul Sthan
- 954 MUR-J
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
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NASSDOC Library | हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह | 954 MUR-J (Browse shelf(Opens below)) | Available | 54015 |
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| 929.834 SHU-F फणीशवरनाथ रेणु के उपन्यास : लोकतत्व एव सरंचना | 940.5412 MEH-T टेंकमेंन | 954 HAB-I Itihas aur vichardhara | 954 MUR-J जंबूद्वीपे भरतखंडे: | 954 PAN-; Gathbandhan sarkaren evam rashtrapati ki bhumika: 1989-2009 | 954 RAT-; Madyakaline marwad ka sanskratic adhyan: 1600-1800 | 954.025 DAV-S शिवाजी व् सुराज/ |
भारतीय चिंतन में कल्प की अवधारणा का समय के साथ-साथ व्योम; यानी देश के हिसाब से भी विचार किया गया है। पृथ्वी के द्वारा सूर्य का परिभ्रमण करने से संवत्सर काल बनता है। इसी प्रकार जब सूर्य अपनी आकाशगंगा का चक्कर लगाता है तो उसका एक चक्र पूरा होने के समयखंड को मन्वंतर कहा जाता है।
इस प्रकार आकाशगंगा भी इस ब्रह्मांड में किसी ध्रुवतारे या सप्तर्षि या अन्य तारे का चक्कर लगाती है; उसके एक चक्कर की गणना को ही कल्प कहा गया। हमारा सौरमंडल आकाशगंगा के बाहरी इलाके में स्थित है और उसके केंद्र की परिक्रमा कर रहा है। इसे एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 22.5 से 25 करोड़ वर्ष लग जाते हैं। —इसी पुस्तक से
भारतीय जीवन में देश और काल है। काल के साथ गति है और गति के संग जीवनदर्शन जुड़ा है। यह बात ही भारत को विशिष्ट बनाती है। कालचक्र; युगचक्र; ऋतुचक्र; धर्मचक्र; भाग्यचक्र और कर्मचक्र के विधान भारतीय सांस्कृतिक चेतना में समाए हुए हैं।
सनातन के माहात्म्य; भारतीय चिंतन की वैज्ञानिकता और भारतीय जीवन-मूल्यों की पुनर्स्थापना करती विचारोत्तेजक पठनीय कृति।
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