अँधेरे का ताला/ ममता कालिया
Publication details: New Delhi: Vani Prakashan; 2018Description: 112pISBN:- 9788181439994
- Andhere Ka Taala / Mamta Kalia
- 891.43 KAL-A
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
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NASSDOC Library | हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह | 891.43 KAL-A (Browse shelf(Opens below)) | Available | 54685 |
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| 891.4 SIH-M माँ की पुकार | 891.4 SIN-S सम्बोधित / | 891.43 BAG-H हो गई आधी रात/ | 891.43 KAL-A अँधेरे का ताला/ | 891.43 KAL-B भविष्य का स्त्री विमर्श/ | 891.43 KAL-B बोलनेवाली औरत | 891.43 NAG-K कुम्भीपाक / |
'अँधेरे का ताला' में ममता ने अपने चिरपरिचित परिवेश - कॉलेज की अध्यापिकाओं, छात्राओं और अन्य कर्मचारियों के जीवन - को चित्रित किया है। निराला की प्रसिद्ध कविता की पंक्तियों को सामने रखते हुए ममता ने 'अँधेरे का ताला खोलने वालों' की असलियत को अपने सुपरिचित व्यंग्य-विनोद भरी शैली में उकेरा है। शिक्षा का क्षेत्र किस तरह की उथल-पुथल का शिकार है, इसका एक दस्तावेज़ी चित्रण ममता ने इस उपन्यास में किया है और अन्त में नन्दिता और उसकी छात्राओं की हिम्मत पाठक को एक अदम्य साहस से भर जाती है। उपन्यास की ख़ूबी यह है कि ममता ने कहीं भी उपदेश देने की कोशिश नहीं की, बल्कि इस 'अँधेरे' के अक्स खींचते हुए 'उजाले' के द्वीपों पर भी नज़र डाली है।
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