विज्ञापन और ब्रांड / संजय सिंह बघेल
Language: hin- Publication details: नई दिल्ली : सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन, 2016.Description: 308pISBN:- 9788173098673
- Vigyapan aur brand
- 659.12 BAG-V
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NASSDOC Library | 659.12 SAN-V (Browse shelf(Opens below)) | Available | 54769 |
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| 659.1042 CHA-L Language, media and society: essence of advertising communication | 659.1042 CHA-L Language, media and society: essence of advertising communication | 659.10688 CHA-; Rise of Asian advertising | 659.12 SAN-V विज्ञापन और ब्रांड / | 659.2 GLO; Global public relations handbook: theory, research and practice | 659.2 PRI- Principles of strategic communication / | 659.2 WES- Western European perspectives on the development of public relations : |
वर्तमान बाजार संचालित समय में मानव जीवन के बीच विज्ञापन की बड़ी भूमिका है। आज स्थिति यह है कि बिना विज्ञापन के अच्छे-से-अच्छे उत्पाद भी धरे रह जाते हैं और कमजोर उत्पाद भी बाजार में अपना स्थान बना लेते हैं, लेकिन एक अच्छे उत्पाद को ब्रांड बनाने का काम विज्ञापन ही करता है। आज विज्ञापन इंडस्ट्री में रोजगार के अनेक अवसर सृजित हो रहे हैं। यही कारण है अकादमिक दुनिया में एक स्वतंत्र अनुशासन के रूप में स्थापित होने की ओर यह अग्रसर है।
देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में विज्ञापन को पाठ्यक्रम में समावेश किया गया है, लेकिन अब तक विज्ञापन पर हिंदी माध्यम में ऐसी पुस्तकों की कमी थी जिसमें विज्ञापन के उद्भव और विकास, इतिहास, प्रकृति और स्वरूप, सिद्धांत, विज्ञापन के विभिन्न प्रकार तथा उसके निर्माण की प्रक्रिया पर विस्तार से विश्लेषण और विवेचन किया गया हो। यह पुस्तक इस कमी को पूरा करने का एक सफल प्रयास है जिसका श्रेय डॉ. संजय सिंह बघेल को जाता है, जिन्होंने मनोयोगपूर्वक इस श्रमसाध्य कार्य को पूरा किया है। इस पुस्तक की सामग्री में विज्ञापन के सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक दोनों पक्षों का समावेश किया गया है। साथ ही इसमें देशभर के विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जा रहे बी.ए. और एम.ए. स्तर के पत्रकारिता एवं जनसंचार पाठ्यक्रम को भी ध्यान में रखा गया है। इसके साथ ही विज्ञापन और मार्केटिंग तथा ब्रांड और ब्रांडिंग पर भी विस्तार से चर्चा की गई है।
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