अखबारनामा : साम्राज्यवादी पत्रकारिता: वैश्वीकरण के दौर में भारतीय पत्रकारिता का एक जायजा अलोक श्रीवास्तव
Publication details: मेरठ: संवाद प्रकाशन , 2020.Edition: द्वितीय संस्करणDescription: 380pISBN:- 9788194436249
- Akhbarnama: Samrajyavaadi Patrakarita (Vaishvikaran ke daur mein Bharatiya Patrakarita ka ek Jaayza)
- 070.4 SRI-A
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NASSDOC Library | हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह | 070.4 SRI-A (Browse shelf(Opens below)) | Available | 54902 |
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| 070 LOD-S Samacharpatra jagat main abhutpurva kranti: ek aarthik vishleshan | 070 PTR-A पत्रकारिता के भूषण | 070.4 LOD-S समाचार जगत में अभूतपूर्व क्रांति | 070.4 SRI-A अखबारनामा : साम्राज्यवादी पत्रकारिता: वैश्वीकरण के दौर में भारतीय पत्रकारिता का एक जायजा | 070.4082 KAN-I Antarrashtriya mahila dasak aur Hindi patrakarita | 070.40954 SRI-S समग्र भारतीय पत्रकारिता | 123.5 PRA-M मुक्ति: |
देश भर में सूचना और संचार-क्रांति ने अख़बारों के विराट नेटवर्क को जन्म दे दिया है – बीसबीस शहरों से निकलने वाले 10-10 लाख बिकने और 1-1 करोड़ पाठकों द्वारा पढ़े जाने वाले ये अख़बार, जो वैचारिक सामग्री शिक्षित वर्ग तक ले जा रहे हैं, उसमें कोई चयन-दृष्टि नहीं है. उसमें भविष्य का कोई सपना नहीं है. यह पत्रकारिता आज उन शक्तियों के हाथ में है जो स्वतंत्रतासंग्राम के दौर में अर्जित मूल्यों से भी समाज को पीछे ले जाना चाहते हैं - एक ऐसी मध्यकालीनता की ओर जो भारत को असंख्य गृहयुद्धों की ऐसी रणभूमि में तब्दील कर देगी, जिस पर साम्राज्यवादी गिद्धों के मंडराते डैने ही दिखेंगे..
HINDI
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