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परेणा स्रोत विलक्षण संत मोनी बाबा की पुण्य कथा आचार्य अभिषेक कुमार उपाध्याय

By: Language: HIN Publication details: वाराणसी उत्तर प्रदेश: संस्कृति प्रकाशन , 2017Edition: प्रथम संस्करणDescription: 153pISBN:
  • 9789385717703
Other title:
  • Parena Sarot Vilakshan Sant Moni Baba Ki Puny Katha
Subject(s): DDC classification:
  • 294.5092 UPA-P
Summary: विश्वपटल पर भारत की पहचान ऋषियों योगियों मुनियों से है और संत परम्परा में अनेक कोटि के संत हुए हैं। यह जरूरी नहीं कि जो घर परिवार का त्याग कर गुफा कंदराओं में समाधि लगाते हैं वे ही उच्च्चकोटि के संत होते हैं। सद्गृहस्थ संतों की एक लम्बी श्रृंखला है। याज्ञवल्क्य, पाराशर आदि से चलकर यह परम्परा रामकृष्ण परमहंस तक आती है। बलिया जो पावन गंगा एवं सरजू के गोद में बसी हुई स्थली है जिसके गाथा को गाते हुए इतिहास भी गौरवान्वित हो अपने वक्ष को फुला लेता है, मुझे कहने में कत्तई संकोच नहीं कि यहाँ की पावन मिट्टी सिर्फ इतिहास गढ़ना जानती है। साहित्यकारों में पशुराम चतुर्वेदी हों या आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी के तुलसी तारकेश्वर मिश्र 'राही' हो या पाती पत्रिका के सम्पादक अशोक द्विवेदी महापण्डित रघुनाथ शर्मा जी हों या पं० देवस्वरूप मिश्र ये सभी इसी पवित्र धरा की उपज रहे, हैं। स्वतन्त्रता सेनानी पं. मंगल पाण्डे को कौन नहीं जानता ? आन-बान स्वाभिमान के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाली उर्वरा धरती पर महर्षि भृगु का आश्रम है। और यह उनकी तपस्थली भी रही है। बलिया जनपदवासी सुदिष्ट बाब एवं नागा बाबा के तप त्याग से भी भली-भाँति परिचित होंगे उसी क्रम में ब्राह्मणवंशावतंश कुलोद्धारक श्री श्री 1008 मौनी बाबा के तप की छाया में फलने फूलने वालों का एक निष्ठ विश्वास है कि वे सनातन परम्परा के धर्मध्वजा को फहराने के लिए वाणी के रहते हुए मूक आचरण कर लोगों को सीख देने के लिए शरीरधारी हो आये थे। ऐसे सन्त के पावन चरित का चिन्तन-मनन एवं स्मरण करने मात्र से मानव जीवन का कल्मष दूर हो जाता है यह आर्ष शास्त्र चिन है। उसी क्रम में कुलदीपक आचार्य अभिषेक कुमार उपाध्याय अपने ज्ञानेन्द्रिय दर्शन ष्टि से दर्शनोपाधि को चरितार्थ करते हुए जिस विन ग्रन्थ को सम्पादित करने का वीणा उठाये हैं। ह स्तुत्य है। मैं परमतपस्वी मौनी बाबा को टिशः प्रणाम निवेदित करने के साथ ही भिषेक कुमार उपाध्याय के निर्मल चरित्र एवं ज्वल भविष्य के प्रति शुभकामना व्यक्त करता -डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी 'कंचन'
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Books NASSDOC Library हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह 294.5092 UPA-P (Browse shelf(Opens below)) Available 54913

विश्वपटल पर भारत की पहचान ऋषियों योगियों मुनियों से है और संत परम्परा में अनेक कोटि के संत हुए हैं। यह जरूरी नहीं कि जो घर परिवार का त्याग कर गुफा कंदराओं में समाधि लगाते हैं वे ही उच्च्चकोटि के संत होते हैं। सद्गृहस्थ संतों की एक लम्बी श्रृंखला है। याज्ञवल्क्य, पाराशर आदि से चलकर यह परम्परा रामकृष्ण परमहंस तक आती है। बलिया जो पावन गंगा एवं सरजू के गोद में बसी हुई स्थली है जिसके गाथा को गाते हुए इतिहास भी गौरवान्वित हो अपने वक्ष को फुला लेता है, मुझे कहने में कत्तई संकोच नहीं कि यहाँ की पावन मिट्टी सिर्फ इतिहास गढ़ना जानती है। साहित्यकारों में पशुराम चतुर्वेदी हों या आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी के तुलसी तारकेश्वर मिश्र 'राही' हो या पाती पत्रिका के सम्पादक अशोक द्विवेदी महापण्डित रघुनाथ शर्मा जी हों या पं० देवस्वरूप मिश्र ये सभी इसी पवित्र धरा की उपज रहे, हैं। स्वतन्त्रता सेनानी पं. मंगल पाण्डे को कौन नहीं जानता ? आन-बान स्वाभिमान के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाली उर्वरा धरती पर महर्षि भृगु का आश्रम है। और यह उनकी तपस्थली भी रही है। बलिया जनपदवासी सुदिष्ट बाब एवं नागा बाबा के तप त्याग से भी भली-भाँति परिचित होंगे उसी क्रम में ब्राह्मणवंशावतंश कुलोद्धारक श्री श्री 1008 मौनी बाबा के तप की छाया में फलने फूलने वालों का एक निष्ठ विश्वास है कि वे सनातन परम्परा के धर्मध्वजा को फहराने के लिए वाणी के रहते हुए मूक आचरण कर लोगों को सीख देने के लिए शरीरधारी हो आये थे। ऐसे सन्त के पावन चरित का चिन्तन-मनन एवं स्मरण करने मात्र से मानव जीवन का कल्मष दूर हो जाता है यह आर्ष शास्त्र चिन है। उसी क्रम में कुलदीपक आचार्य अभिषेक कुमार उपाध्याय अपने ज्ञानेन्द्रिय दर्शन ष्टि से दर्शनोपाधि को चरितार्थ करते हुए जिस विन ग्रन्थ को सम्पादित करने का वीणा उठाये हैं। ह स्तुत्य है। मैं परमतपस्वी मौनी बाबा को टिशः प्रणाम निवेदित करने के साथ ही भिषेक कुमार उपाध्याय के निर्मल चरित्र एवं ज्वल भविष्य के प्रति शुभकामना व्यक्त करता -डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी 'कंचन'

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