फणीशवरनाथ रेणु के उपन्यास : लोकतत्व एव सरंचना प्रेमशीला शुक्ल,
Language: HIN Publication details: दिल्ली ज्ञान पब्लिशिंग हाउस , 2010Edition: प्रथम सस्करणDescription: 264PISBN:- 9788121210577
- “Phanishwarnath Renu ke Upanyas: Loktatva ev Sanrachna
- 929.834 SHU-F
| Cover image | Item type | Current library | Home library | Collection | Shelving location | Call number | Materials specified | Vol info | URL | Copy number | Status | Notes | Date due | Barcode | Item holds | Item hold queue priority | Course reserves | |
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NASSDOC Library | हिंदी पुस्तकों पर विशेष संग्रह | 929.834 SHU-F (Browse shelf(Opens below)) | Available | 54886 |
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| 923.33092 DEE- दीनदयाल उपाध्याय एवं भारतीय अर्थव्यवस्था | 923.454 NAR-M में भूल न जाऊ | 923.554 KAL-M माय लाइफ: | 929.834 SHU-F फणीशवरनाथ रेणु के उपन्यास : लोकतत्व एव सरंचना | 940.5412 MEH-T टेंकमेंन | 954 HAB-I Itihas aur vichardhara | 954 MUR-J जंबूद्वीपे भरतखंडे: |
रेणु के उपन्यास पाठक को रूप, रस, गन्ध
और स्पर्श की ऐसी दुनिया में ले जाते हैं, जहाँ
अनुभूतियाँ तीव्र हो जाती हैं। यह जीवनानुभव के
कलानुभव में रूपान्तरण का जादू है।
अपर्याप्त होगा, यह कहना कि रेणु मिथिला
के जीवन को चित्रित करते हैं। इससे आगे बढ़कर
वे यह चित्रित करते हैं कि वहाँ जीवन जिस रूप में
है, वह उसी रूप में क्यों है।
मेरीगंज और परानपुर के वर्तमान को देखने
के साथ-साथ रेणु की संवेदना उन दबावों को भी
महसूस करती है, जो इतिहास की शक्ति के दबाव
हैं, उन संकल्पों की गूंज सुनती है, जो इतिहास को
बदल देने की ताकत रखते हैं।
रेणु के उपन्यासों में निहित आंचलिकता
और लोक की संकल्पना को अति सीमित
स्थानिकता से अलग करके देखना समीचीन
होगा। अपनी स्थानिक विशेषता को सुरक्षित रखते
हुए अंचल यहाँ लोक का हिस्सा है। 'मैला आंचल'
में मिथिला और संथाल परगना, 'परती : परिकथा'
में मिथिला और नेपाल एवं 'जुलूस' में मिथिला और
बंगाल एक साथ हैं।
प्रस्तुत कृति रेणु के उपन्यासों का गहन पाठ
करती हुई अध्ययन के मूल्यवान निष्कर्षों तक
पहुँचती है।
आम आदमी की बात को उसी की जुबान में
पेश करने के लिए रेणु मानवीय व्यवहार के उस
संसार में पहुंचते हैं, जहाँ जाने का रास्ता भाषा
देती है और इसके लिए वह कई भेष धारण करती
है। रेणु के उपन्यासों की भाषा का भेष लोक
सांस्कृतिक तत्त्वों के नये भाष्य से सजता है।
रेणु के उपन्यासों के संदर्भ में नए तरह से
विमर्श करने वाली एक पुस्तक ।
HINDI
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