बोलनेवाली औरत
BolneyWali Aurat/ Mamta Kalia
- New Delhi: Vani Prakasana; 2012
- 91p.; 22 cm
ममता कालिया के रचना लोक में दो तरह की छवियाँ प्रमुख हैं। एक में हमारे भारतीय समाज के मध्यवर्ग की स्त्रियाँ और उनका दुःख है। दूसरे में सामान्य जीवनानुभव हैं। ममता कलिया महिला त्रासदी के स्थूल रूपों को अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बनातीं। जरूरत पड़ने पर वह त्रासदी की कुछ परंपरागत स्थितियों को शामिल करती हैं किन्तु ज्यादातर वह कठिन मगर बेहतर प्रणाली उपयोग में लाती हैं। उनकी दिलचस्पी सूक्ष्म स्तरों और गहरे प्रभावों-प्रतिक्रियाओं को उद्घाटित करने में दिखती है। ममता कलिया ने इन कहानियों को महिलावादी क्रोधी भंगिमा से नहीं रचा है, न ही इनमें औरतों के प्रति अबोध आकुलता आकुलता है। ये गुस्से और भावुकता से पृथक निर्भर और निस्संग तरीके से यथार्थ को हाजिर करती हैं। वस्तुतः उनकी कहानियाँ नारीवाद न होकर नारी के यथार्थ की रचनाएँ हैं