| 000 | 01543nam a22001697a 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 999 |
_c25336 _d25336 |
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| 020 | _a9789383725946 | ||
| 082 |
_a302.2 _bYAD-M |
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| 100 |
_aयादव, अनिल कुमार _qYadav, Anil Kumar |
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| 245 | _aमानव संचार | ||
| 246 | _aManav sanchar | ||
| 260 |
_aदिल्ली _bकल्पना प्रकाशन, _c2017 |
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| 300 | _a168p. | ||
| 520 | _aइस पृथ्वी पर जब भी मानव सभ्यता का अतभवारव हुआ है तभी से संचार की आवश्यकता का भी अनुभव दकआ जाना लगा । जैसे जैसे भाषाओ का तवकाश हुआ संचार माध्यमों का भी तवकाश होता गया । आज संचार की सामातजक जीवन में उपयोतगता असंदिग्य है । तशिा तवज्ञानं , उद्योग कृतष आदि मेंसंचार संप्रेिण की तवतभन उन्नत तकनीकों नेएक नई क्रांतत का सूत्रपात दकया है । आज मानव जीवन में संचार का महत्वपूणभ स्थान ह | ||
| 546 | _aHindi Book | ||
| 650 |
_aTale Communication _vAncient - India _zSocial Communication - India |
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| 942 |
_2ddc _cBK |
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