| 000 | 04312nam a22001817a 4500 | ||
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| 999 |
_c25338 _d25338 |
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| 020 | _a978-81-88790-72-2 | ||
| 082 |
_a302.23 _bMEE-M |
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| 100 |
_aमीणा, राम लखन _qMeena, Lakhan Ram |
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| 245 |
_aमीडिया विमर्श _b: आधुनिक सन्दर्भ |
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| 246 | _aMedia vimarsh: aadhunik sandarbh | ||
| 260 |
_a नई दिल्ली _bकल्पना प्रकाशन _c2018 |
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| 300 | _a278p. | ||
| 504 | _aInclude Index | ||
| 520 | _aभारत में नदियों केदकनारे बसी वैदिक बतस्तयों ने सबसे पहलेइनके प्रतत अपनी जवाबिेही जातहर करते हुए पयाभवरण को लेकर सांततमंत्र तैयार दकया, तजसमे धमभ यातन कर्त्भव्य पालन के रूप में घर घर तक पहुंचाया दकन्तु यही कर्त्भव्य परनता भारतीय मीतडया से लगभग गायब है । मीतडया और समाज के टरश्ते मेंिो पिसचंताजनक है । मीतडया और मीतडया कमी महानगरों के उपभोगता वाड़ी वगभ की तचन्ताओ से ग्रस्त है। िेश के आम नागटरक की िुख सुख की खबरे कमोवेश गायब हैिू सरा सचंताजनक पि मीतडया कर्मभयों की सामातजक पृस्ठभूतम से जुड़ा है । एक सवे के अनुसार िेश की खबरे तय करने वालो में८३ फीसिी पुरुष है और ८२ फीसि तहन्िू तिज जाततयों से । मुस्लमान व तपिड़ी जाततया तसफभ ४ फीसि और ितलत आदिवािी शून्य शोध से पता चला हैकी सहंिी मीतडया में८७ फीसि मीतडया कमी ब्रामण पटरवार सेहै दकन्तु उन्होंने अपनी पहचान िुपाने के तलए उनके नमो से जाततसूचक शब्ि हिा तलए गए है ।तपिले लोकसभा चुनाव और उसके बाि इसके एक संस्तागत पहलु का खुलासा हुआ अनेक अखबारों ने चुनाव में पार्िभयों और उमीिवारो केपि में खबरे िापने के िाम वसूले कई अखबारों ने कंपतनयों के हक में खबरे िापने के बाकायिा तलतखत करार कर रखे है । मीतडया और जी केइस नापाक टरश्ते पर कुि बंदिशे लगनी जरुरी है । अतधकांश अख़बार और िी वी चैनल पूंजीपतत या कंपनी की तमलदकयत मेंहै और मातलक मीतडया का इस्तेमाल अपने व्यावसातयक तहतो के तलए करना चाहता है । अनेक मीतडया के मातलक या तो टरयल स्िेि धंिा चलाते है, या दफर टरयल स्िेि पर अनाप सनाप पैसा कमाने वाली िी वी चैनल खोल लेते है यहााँ तक की मीतडया का इस्तेमाल िलाली के तलए भी होता है | ||
| 546 | _aHindi Book | ||
| 650 |
_aJournalism _aMass Media _vMass Communication _zEmergency |
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| 942 |
_2ddc _cBK |
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