000 03451nam a2200241 4500
999 _c38385
_d38385
020 _a9788171199730
041 _ahin
082 _a891.43
_bYAD-S
100 1 _aयादव, राजेन्द्र
_qYadav, Rajendra
_eलेखक.
_eauthor.
245 1 0 _aशह और मात :
_bसुजाता की डायरी /
_cराजेन्द्र यादव
246 _aShah aur Maat: Sujata ki Diary
260 _aदिल्ली :
_bराधाकृष्ण प्रकाशन,
_c2018.
300 _a191p.
504 _aIncludes bibliographical references and index.
520 _a'शह और मात' दूसरे प्यार की जटिल और कटु कहानी है, जहाँ अपराध - भावना से पीड़ित प्रत्येक पात्र अपना पुनरान्वेषण करता है और अन्त में अपने को एक यंत्रणादायक भ्रान्ति और छलना से घिरा पाता है। उपन्यास की भाषा अपनी ताज़गी, अभिव्यंजना और शक्ति के लिए बार-बार प्रशंसित हुई है। इस उपन्यास को पढ़ना एक अद्भुत - लेकिन बेहद आत्मीय-अनुभव से गुज़रना है, जो अपने को देखने की नई दृष्टि देता है। 'शह और मात',...एक शुद्ध मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, इसमें दो व्यक्तियों के प्रति तीसरे व्यक्तित्व (यानी सुजाता) की प्रतिक्रियाओं का वर्णन है। अचरज की बात यह है कि देशकाल की स्थितियों से प्रायः कोई मदद न लेते हुए भी लेखक इस उपन्यास को इतना नाटकीय और सजीव बना देता है! सुजाता की उदय से सम्बद्ध दिलचस्पी क्रमशः अधिक तीखी और गहरी होती जाती है। यह दिलचस्पी बहुत कुछ बौद्धिक क़िस्म की है, उपन्यास की नाटकीयता भी एक ख़ास तरह का बौद्धिक मनोवैज्ञानिक विनोद करती है। उपन्यास की नाटकीयता और रोचकता का एकमात्र रहस्य उसकी मनोवैज्ञानिक सूक्ष्मता एवं यथार्थ अनुकारिता है। उपन्यास का प्रत्येक पन्ना रोचक है।
546 _aHindi.
650 _aप्रेम कहानियां.
650 _aमनोवैज्ञानिक कथा.
650 _aSelf-exploration.
650 _aएकाधिक व्यक्तित्व.
650 _aधोखा और हेराफेरी.
942 _2ddc
_cBK