000 03407nam a2200217 4500
999 _c38410
_d38410
020 _a9788180315732
041 _ahin-
082 _a320.54
_bBAD-L
100 1 _aनारायण, बद्री
_qBadrinarayan,
_eलेखक.
_eauthor.
245 1 0 _aलोकसंस्कृति में राष्ट्रवाद /
_cबद्रीनारायण
246 _aLoksanskriti mein Rashtravad
260 _aप्रयागराज :
_bलोकभारती प्रकाशन,
_c2014.
300 _a108p.
504 _aincludes bibliographical references and index.
520 _aप्रस्तुत पुस्तक 'लोकसंस्कृति में राष्ट्रवाद' में शोध को एक ढांचा प्रदान करने के लिये तीन लोक कवियों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है जो लोक चेतना के तीन काल खण्डों में प्रतिनिधि हैं। लोकसंस्कृति के कुछ अन्य रूपों का उपयोग इतिहास लेखन और लोकसंस्कृति में किया है। इसमें सन् 57 के गदर की झलक भी शामिल है। लोकसंस्कृति को समय में बाँधने के कारण इस अध्ययन की कई सीमाएँ बन गयी हैं। पुस्तक में अन्तः अनुशासनिक तकनीकों एवं प्रविधियों का उपयोग किया गया है। इसमें मौखिक इतिहास की उपलब्ध प्रविधि को विकसित करने का प्रयास है। पुस्तक छह खण्डों में विभाजित है-राष्ट्रवाद का प्रमेय, इतिहास लेखन और लोकसंस्कृति, रचना का काल (1857 से 1900 ई.) / लोक सजगता एवं शुकदेव भगत की संघटना का वृत्तान्त, विरचना का काल (1900-1920 ई.) लोक संस्कृति में स्वीकार और बहिष्कार पुनर्रचना का काल (1920-1947 ई.) लोक चेतना की क्रियात्मक क्षमता का पुनर्निर्माण और कवि कैलाश का संदर्भ तथा निष्कर्ष आदि विषयों का समावेश किया गया है। पुस्तक निश्चय ही पठनीय और संग्रहणीय है।
546 _aHindi.
650 _aलोक संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान.
650 _aपारंपरिक रीति-रिवाजों और परंपराओं में राष्ट्रवाद.
650 _aसांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रवादी भावनाएँ.
942 _2ddc
_cBK