000 06832nam a2200265 4500
999 _c39400
_d39400
020 _a9788119028818
041 _ahin-
082 _a954.03
_bHAB-B
100 _aहबीब, एस इरफ़ान
_eलेखक.
245 _aभारतीय राष्ट्रवाद :
_bएक अनिवार्य पाठ /
_cलेखक एस इरफ़ान हबीब
260 _aदिल्ली:
_bराजकमल प्रकाशन प्रा. लिमिटेड,
_c2023.
300 _a344p.
504 _aIncludes bibliography and index.
520 _aराष्ट्रवाद क्या है? राष्ट्रवाद से आप क्या समझते हैं? अच्छा राष्ट्रवादी कौन है? अगर आप सरकार की आलोचना करें तो क्या आपको राष्ट्रद्रोही मान लिया जाए? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो आजकल की ज़्यादातर बहसों में हावी रहते हैं? लेकिन ये बहसें नई नहीं हैं। आज राष्ट्रवाद के बारे में सबसे ऊपर सुनाई देनेवाली आवाज़ें ज़रूर हमें यह विश्वास दिलाने पर आमादा हैं कि भारतीय राष्ट्रवाद एक संकीर्ण, संकुचित और दूसरे लोगों और संस्कृतियों से भयभीत कोई चीज़ रहा है और आज भी ऐसा ही है, लेकिन भारत के सबसे प्रबुद्ध और सुलझे हुए नेताओं, चिन्तकों, वैज्ञानिकों और लेखकों की समझ इससे बिलकुल अलग है; और ये वो लोग हैं जिन्होंने उन्नीसवीं सदी के आरम्भ से ही इस विषय पर सोचना शुरू कर दिया था। राष्ट्रवाद जिस रूप में आज हमारे सामने है, उसे वजूद में आए सौ साल से ज़्यादा हो गए हैं। दुनिया के इतिहास में इसकी भूमिका को लेकर अनेक इतिहासकारों, राजनीतिशास्त्रियों और समाजवैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है। देखा गया है कि राजनीति के लिए यह सबसे निर्णायक कारकों में से एक रहा है। इसकी आलोचना भी ख़ूब हुई है। यह एक दोधारी तलवार है जो लोगों को जोड़ भी सकती है और राजनीति, संस्कृति, भाषा और धर्म के आधार पर बाँट भी सकती है। ऐतिहासिक महत्त्व के इस संकलन में इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध से भारत में राष्ट्रवाद के उदय, विकास और इसके विभिन्न रूपों और चरणों की पड़ताल भारत के सबसे महत्त्वपूर्ण चिन्तकों और नेताओं के विचारों के माध्यम से करते हैं। इस संकलन में उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रमुख नेताओं और चिन्तकों के वे लेख और भाषण-अंश काफ़ी तलाश के बाद एकत्रित किए हैं जो स्पष्ट करते हैं कि आज़ादी के संघर्ष में देश को रास्ता दिखाने वाले और आज़ादी के बाद भी राष्ट्र की दशा-दिशा पर ईमानदार निगाह रखने वाले इन नेताओं की नज़र में राष्ट्रवाद क्या था और वे किस तरह के राष्ट्र और राष्ट्रवाद को फलते-फूलते देखना चाहते थे! यह किताब हमें बताती है कि आज की परिस्थितियों में हम राष्ट्रवाद को कैसे समझें और कैसे उसे आगे बढ़ायें ताकि एक सर्वसमावेशी, स्वतंत्र और मानवीय राष्ट्र के निर्माण की प्रक्रिया बिना किसी अवरोध के जारी रह सके।
546 _aHindi.
650 _aभारतीय राष्ट्रवाद
_vऐतिहासिक अध्ययन
_xविकास और संघर्ष
_zभारत
650 _aभारतीय स्वतंत्रता संग्राम
_vऐतिहासिक दृष्टिकोण
_xराजनीतिक और सामाजिक पहलू
_zभारत
650 _aऔपनिवेशिक भारत
_vसामाजिक और राजनीतिक अध्ययन
_xब्रिटिश शासन के प्रभाव
_zभारत
650 _aभारतीय राजनीति
_vऐतिहासिक विश्लेषण
_xस्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रवादी आंदोलन
_zभारत
650 _aभारतीय समाज
_vसामाजिक संरचना
_xराष्ट्रीय पहचान और संघर्ष
_zभारत
700 _aसिंह, प्रभात
_eअनुवादक.
700 _aकुमार, जीतेन्द्र
_eअनुवादक.
700 _aश्रीवास्तव, अभिषेक
_eअनुवादक. ...[et al.]
942 _2ddc
_cBK