000 03160nam a22001817a 4500
999 _c39464
_d39464
020 _a9788170551805
082 _a891.431
_bNAG-I
100 _aनागार्जुन | Nagarjun
245 _aइस गुब्बारे की छाया में /
_cनागार्जुन
246 _aIs Gubare Ki Chaya Me
260 _aNew Delhi:
_bVani Prakashan,
_c2020.
300 _a107p.
520 _aयहाँ जो भी रचनाएँ संकलित हैं वे पहले अन्य किसी संग्रह में प्रकाशित नहीं की गयी हैं। सुविधा के लिए रचनाओं के साथ उनका लेखन वर्ष भी दे दिया गया है। सन् 1974 में 'युगधारा' और 'सतरंगे पंखों वाली' की अधिकांश रचनाओं के साथ आठ नयी रचनाओं ('मंत्र', 'तर्पण', 'राजकमल चौधरी', 'वह कौन था', 'दूर बसे उन नक्षत्रों पर', 'देवी लिबर्टी', 'तालाब की मछलियाँ, 'और 'जयति जयति जय सर्व मंगला') को मिलाकार 'तालाब की मछिलायाँ' नामक संग्रह आया था। वह संग्रह दस-बारह वर्षों से उपलब्ध नहीं है। गत चार-पाँच वर्षों से 'युगधारा' और 'सतरंगे पंखों वाली' दोनों संग्रह अपने-अपने मूल रूप में उपलब्ध हैं। अतः उन आठों रचनाओं को किसी न किसी संग्रह में आ जाना चाहिए था। उसी क्रम में उन रचनाओं में से चार इस संग्रह में लिए जा रहे हैं। 'रामराज' की बहुचर्चित कविता है। लेकिन अब तक पूरी कविता मिल नहीं पायी है। इसके मात्र दस टुकड़े 'हंस' के जून 1949 के अंक में छपे थे जो अपूर्ण हैं। 'हंस' के अगले अंकों में कविता का शेष अंश नहीं है। सम्भव है कि किसी और पत्रिका में हो जहाँ तक हमारी पहुँच नहीं हो पायी है अब तक। बहुत प्रयास के बाद भी पाठान्तर और पाठशोध की सम्भावना बनी हुई है यह हमारी लाचारी है
546 _aHindi
650 _aHindi Poem
_v Poetry
650 _aHindi Literature
942 _2ddc
_cBK