| 000 | 01846nam a22001817a 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 999 |
_c39465 _d39465 |
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| 020 | _a9789355180872 | ||
| 082 |
_a891.43 _bNAM-P |
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| 100 | _aसिंह, नामवर | ||
| 245 |
_aपाश्चात्य आलोचक और आलोचना / _cनामवर सिंह. |
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| 246 | _aPASHCHATYA AALOCHAK AUR AALOCHANA | ||
| 260 |
_a नई दिल्ली: _b वाणी प्रकाशन, _c2022. |
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| 300 | _a288p. | ||
| 520 | _aपाश्चात्य आलोचकों और आलोचना सिद्धान्तों पर हिन्दी में स्तरीय पुस्तकें ज़्यादा नहीं हैं। जो पुस्तकें हैं भी, वे पाश्चात्य आलोचना की अवधारणाओं को प्रायः अमूर्त रूप में प्रस्तुत करती हैं। विद्यार्थियों की क्या बिसात है, अच्छे-ख़ासे विद्वान भी उनके निहितार्थों को ठीक से नहीं समझ पाते। ऐसी पुस्तक हिन्दी ही नहीं, अंग्रेज़ी में भी आसानी से नहीं मिलती जो इन अमूर्त अवधारणाओं को उदाहरणों के द्वारा बोधगम्य बनाकर समझा सके। आशा है कि यह पुस्तक इस आवश्यकता की पूर्ति कर पाने में समर्थ हो सकेगी। | ||
| 546 | _aHindi | ||
| 650 | _aHindi Literature | ||
| 650 | _aHindi Fiction | ||
| 942 |
_2ddc _cBK |
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