| 000 | 02516nam a22001937a 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 999 |
_c39467 _d39467 |
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| 020 | _a9789350007013 | ||
| 082 |
_a891.43 _bBAJ-P |
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| 100 | _aवाजपेई, अशोक | ||
| 245 |
_aपोलिश कवि चेस्लाव मीलोष / _cअशोक वाजपेई और रेनाटा ज़ेकाल्स्का |
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| 246 | _aPolish Kavi Czeslaw Milosz | ||
| 260 |
_aनई दिल्ली; _bवाणी प्रकाशन, _c2011. |
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| 300 | _a124p. | ||
| 520 | _aसंसार में अनिवार्य रूप से मौजूद बुराई और मानवीय यातना को अपनी कविता के केन्द्र में रखनेवाले पोलिश कवि चेस्लाव मीलोष बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में विश्व-कविता के अधिकतर उलझे परिदृश्य में एक अनिवार्य नाम रहे हैं। इस समय वे सम्भवतः विश्व-कविता के सबसे जेठे सक्रिय कवि हैं। अपनी जातीय ईसाई परम्परा से मीलोष ने मनुष्य में अनिवार्यतः मौजूद बुराई का तीखा अहसास पाया था। उसे पोलैण्ड में पहले नाज़ी और बाद में साम्यवादी तानाशाहियों द्वारा दमित-शोषित किये जाने के दुखद ऐतिहासिक अनुभवों ने मीलोष को इस बुराई को उसकी सारी विकृतियों और उसमें लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण साझेदारी या उनके बारे में अवसरवादी चुप्पी के साथ नज़दीक से देखने-समझने का अवसर दिया। कविता उनके लिए इसके विरुद्ध संघर्ष की रणभूमि बनी। | ||
| 546 | _aHindi | ||
| 650 | _aHindi Fiction | ||
| 650 | _aHindi Literature | ||
| 700 | _aज़ेकाल्स्का, रेनाटा | ||
| 942 |
_2ddc _cBK |
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