000 02841nam a22002297a 4500
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_d39519
020 _a9789350008683
041 _ahin-
082 _a891.4412
_bNAG-V
100 _aनागार्जुन | Nagarjun
_eलेखक | Author
245 _aविद्यापति की कहानियाँ :
_bमहाकवि विद्यापति की तेरहनीतिपूर्णु कथाएँ /
_cनागार्जुन
246 _aVidyapati ki kahaniyam by Nagarjun
260 _aNew Delhi:
_b Vani Prakashan,
_c2011.
300 _a91p.
520 _aकविता, निबंध, कहानी आदि की भाँति कुछ ऐसी पुस्तकें भी है जो कभी छपी और आज जाने कहाँ दबी पड़ी हैं। ‘नागार्जुन साहित्य’ की सूची में उनका उल्लेख तक नही है। प्रस्तुत पुस्तक भी उनमें से एक है। इसका प्रथम संस्करण 1964 में हुआ और द्वितीय 1966 में। परंतु समुचित प्रचार-प्रसार न होने से यह पुस्तक पाठकों के लिए अब तक ‘दुर्लभ पुस्तकों’ में से एक है। विद्यापति की कहानियों का छाया-रूपांतर उन्हीं दिनों किया गया, जिन दिनों ‘विद्यापति के गीत’ गद्य रूपांतर हुआ,अर्थात 1963 में।
546 _aHindi
650 _aविद्यापति – कृतियाँ
_vकहानियाँ
_xमैथिली साहित्य
650 _aविद्यापति – साहित्य में योगदान
_vअध्ययन और आलोचना
_xमध्यकालीन भारतीय काव्य
650 _aभारतीय साहित्य – मध्यकालीन युग
_vनीति कथाएँ
_xऐतिहासिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य
650 _aमैथिली साहित्य – कथा साहित्य
_vलोककथाएँ और पारंपरिक गाथाएँ
_xसामाजिक और सांस्कृतिक मूल्य
650 _aहिंदी साहित्य – नागार्जुन का लेखन
_vरूपांतर और व्याख्या
_xसाहित्यिक अध्ययन
942 _2ddc
_cBK