मध्यकालीन भारत का आर्थिक इतिहास (1500-1800) / सुनील कुमार सिंह
Language: hin- Publication details: नई दिल्ली: लोकभारती प्रकाशन, 2023.Description: 239pISBN:- 9789393603791
- Madhyakalin Bharat Ka Arthik Itihas (1500-1800) by Sunil Kumar Singh
- भारत – आर्थिक इतिहास -- अध्ययन और विश्लेषण -- 1500-1800
- मुगलकालीन अर्थव्यवस्था -- कृषि और व्यापार -- आर्थिक नीतियाँ और संरचना
- भारतीय व्यापार और वाणिज्य -- आर्थिक प्रभाव -- मध्यकालीन भारत
- कर प्रणाली और भूमि व्यवस्था -- प्रशासनिक नीतियाँ -- मुगल और मराठा शासन
- वैश्विक आर्थिक प्रभाव -- भारत और यूरोपीय व्यापार -- 16वीं-18वीं शताब्दी
- 330.9540903 SIN-M
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NASSDOC Library | 330.9540903 SIN-M (Browse shelf(Opens below)) | Available | 54616 |
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यह पुस्तक नवीनतम स्रोत सामग्री को सन्दर्भित करते हुए लिखी गई है। लेखक ने बड़ी कुशलता के साथ सन्दर्भ ग्रन्थों को समन्वयित किया है कि विशेषज्ञों के अलावा साधारण पाठकों को भी आख्यान बोधगम्य हो सके। इस पुस्तक में मुगलों की नई काराधान व्यवस्था के आने से कृषि के क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली संकटपूर्ण परिस्थितियों को उजागर किया है। लेखक का मानना है कि इस संकट के बावजूद ग्रामीण घरों में सूत कातने और कपड़ा बुनने की परम्पराएँ कायम रहीं। किन्तु मुग़ल नीतियों का दूरगामी परिणाम यह हुआ कि कृषि और शिल्प दो अलग-अलग व्यवसायों के रूप में नज़र आने लगे। अध्याय के अन्त में लेखक ने परम्परागत शिल्पों को स्वतन्त्र व्यवसाय के रूप में प्रस्तुत कर लम्बे अरसे से चली आ रही भ्रान्तियों को दूर किया है। शिल्प उत्पादन के सम्बन्ध में विस्तृत वृत्तान्त मिलता है। दक्षिण भारत के राजस्व इतिहास को समाहित कर इस पुस्तक को पूर्णतः समावेशी बना दिया गया है। पाँचवें अध्याय में मध्यकालीन कराधान की व्यवस्था, शहरी उत्पादन, सिक्कों के प्रकार और प्रसार का उल्लेख है। मध्यकालीन भारत में नाप-तौल की प्रणालियों, मजदूरी और उत्पादकों पर विदेशी पूँजी के बढ़ते दबाव से सम्बन्धित है। लेखक ने तालिकाओं और आँकड़ों की सहायता से व्यापार और व्यवसायों के समक्ष बढ़ती चुनौतियों को स्पष्ट किया है। विश्वास है कि सुधी पाठकों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे पाठकों को यह रचना समान रूप से पसन्द आएगी। ललित जोशी प्रोफेसर, इतिहास विभाग
Hindi.
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